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AI की दौड़ में भारत की स्थिति क्या? अमेरिका और चीन अभी भी आगे हैं

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नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) दुनिया की सबसे तेज़ी से विकसित हो रही टेक्नोलॉजी में से एक है। AI समाधान बैंकिंग, डिफेंस, इंडस्ट्री, एजुकेशन और हेल्थकेयर जैसे जीवन के लगभग हर क्षेत्र में तेज़ी से अपनी जगह बना रहे हैं। इससे यह सवाल उठता है कि AI को विकसित करने और उसका इस्तेमाल करने की ग्लोबल दौड़ में भारत कहाँ खड़ा है? ऐसा लगता है कि हम तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं, हालाँकि अमेरिका और चीन अभी भी हमसे बहुत आगे हैं।

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भारत के पास कई बड़े फायदे हैं, जैसे कि करोड़ों इंटरनेट यूज़र्स वाला विशाल डिजिटल इकोसिस्टम और दुनिया में IT टैलेंट का सबसे बड़ा पूल। हाल के वर्षों में कई भारतीय कंपनियों और स्टार्टअप्स ने AI प्रोडक्ट्स और सर्विसेज़ को विकसित करने की दिशा में अपने प्रयास तेज़ किए हैं, जबकि सरकार ‘इंडिया AI मिशन’ जैसे प्रोग्राम्स के ज़रिए AI रिसर्च, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप्स को बढ़ावा दे रही है।

हालाँकि, AI एक्सपर्ट्स का कहना है कि लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLMs), क्रांतिकारी AI रिसर्च और ऐसे मॉडल्स को चलाने के लिए ज़रूरी चिप्स के मामले में भारत को अभी भी लंबा सफ़र तय करना है। आज, OpenAI, Google, Anthropic और Meta जैसी दिग्गज कंपनियाँ, साथ ही चीन की कुछ कंपनियाँ, इस सेक्टर में भारी निवेश के कारण ग्लोबल AI डेवलपमेंट पर हावी हैं। हालाँकि भारत AI टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल और डेवलपमेंट में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, लेकिन दुनिया के लिए बड़े फाउंडेशन मॉडल्स विकसित करने के मामले में यह अभी भी शुरुआती दौर में है।

फिर भी, मौके बहुत बड़े हैं। अपनी डिजिटल इकॉनमी, UPI जैसे प्लेटफॉर्म्स, तेज़ी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम और खास तौर पर भारतीय भाषाओं के लिए AI टूल्स डिज़ाइन करने की क्षमता के दम पर, भारत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण AI मार्केट्स में से एक बनने की राह पर है। अगर अगले कुछ वर्षों में रिसर्च, कंप्यूट पावर और सेमीकंडक्टर इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश काफी बढ़ता है, तो भारत सिर्फ़ AI टेक्नोलॉजी का यूज़र बनने के बजाय ग्लोबल AI इनोवेशन के एक महत्वपूर्ण हब के तौर पर उभर सकता है।

टेक एक्सपर्ट्स का कहना है कि AI की दौड़ का अगला चरण सिर्फ़ बड़े निवेश पर ही नहीं, बल्कि टैलेंट, इनोवेटिव क्षमताओं और घरेलू ज़रूरतों के हिसाब से डिज़ाइन किए गए प्रोडक्ट्स पर भी आधारित होगा, जिससे भारत AI टेक्नोलॉजी के बारे में सोच और नज़रिया बदलने में सक्षम देश बन सकेगा।