जयपुर से जापान तक: भारतीय मूल के कारोबारी Ryuko Hira की अनोखी कहानी
भारत में जन्म लेकर जापान में कारोबारी पहचान बनाने वाले Ryuko Hira का सफर कई दशकों में फैला हुआ है। उनका जीवन केवल विदेश में व्यवसाय स्थापित करने की कहानी नहीं है, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति की यात्रा भी है जिसने अलग भाषा, संस्कृति और कारोबारी माहौल के बीच अपनी जगह बनाई।
1948 में जयपुर में जन्मे उनका नाम उस समय Kamlesh Punjabi था। बाद में वे जापान पहुंचे और वहीं अपने जीवन और करियर की नई दिशा तय की। आज वे जापान के होटल और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े प्रमुख भारतीय मूल के कारोबारियों में गिने जाते हैं।
जयपुर में हुआ जन्म
उनका शुरुआती जीवन राजस्थान के जयपुर में बीता। परिवार का संबंध व्यापार से था और इसी माहौल में उन्हें कारोबार की बुनियादी समझ मिली।
बाद में पढ़ाई के लिए उन्होंने मुंबई का रुख किया। रत्न और जेमोलॉजी से जुड़ी शिक्षा ने भी उनके शुरुआती पेशेवर जीवन में भूमिका निभाई। हालांकि, आगे चलकर उनका करियर होटल और पर्यटन क्षेत्र की ओर बढ़ गया।
जापान में शुरू हुआ नया अध्याय
जापान जाने के बाद उनके सामने कई नई चुनौतियां थीं। भाषा अलग थी, संस्कृति अलग थी और कारोबार करने का तरीका भी भारत से काफी अलग था।
उन्होंने धीरे-धीरे वहां के माहौल को समझा और अपने संपर्कों का विस्तार किया। लंबे समय तक जापान में रहने के दौरान उन्होंने स्थानीय समाज और व्यापारिक क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई।
1976 में उन्होंने जापानी नागरिकता हासिल की और Ryuko Hira नाम अपनाया। इसके बाद उनका जीवन और कारोबार जापान से और अधिक मजबूती से जुड़ गया।
होटल और पर्यटन क्षेत्र में बढ़ता कारोबार
उनके व्यावसायिक सफर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होटल उद्योग रहा। वे HMI Hotel Group के अध्यक्ष हैं, जो जापान में होटल और पर्यटन से संबंधित कारोबार करता है।
समूह की गतिविधियां जापान के अलग-अलग क्षेत्रों तक फैली हुई हैं। इसके होटल शहरों के साथ-साथ पर्यटन स्थलों में भी मौजूद हैं, जहां घरेलू और विदेशी यात्रियों को सेवाएं दी जाती हैं।
होटल कारोबार में लंबे अनुभव के साथ उनका जुड़ाव जापान के पर्यटन उद्योग से भी मजबूत हुआ।
भारत से रिश्ता कभी खत्म नहीं हुआ
जापान में स्थायी रूप से बसने के बावजूद भारत उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहा। उन्होंने भारत और जापान के बीच कारोबारी संपर्क बढ़ाने वाली गतिविधियों में भी भाग लिया।
जापान में भारतीय कारोबारी समुदाय से उनका जुड़ाव रहा है। व्यापार और उद्योग से जुड़े मंचों के माध्यम से दोनों देशों के बीच संपर्क मजबूत करने की दिशा में भी उन्होंने काम किया।
यह पहलू उनकी कहानी को और खास बनाता है। एक ओर उन्होंने जापान में अपना कारोबार खड़ा किया, वहीं दूसरी ओर अपनी भारतीय पृष्ठभूमि से जुड़े रहे।
भारत में निवेश की दिशा में भी कदम
विदेश में कारोबार स्थापित करने के बाद भी भारत में उनकी रुचि बनी रही। होटल और पर्यटन क्षेत्र में भारत की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए उनके समूह ने देश में विस्तार की योजनाओं पर काम किया।
उत्तर प्रदेश में होटल विकास से जुड़ी निवेश योजना भी इसी दिशा का हिस्सा रही। इससे भारत में पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र को लेकर उनकी कारोबारी दिलचस्पी सामने आती है।
पद्म श्री से सम्मानित
भारत सरकार ने उन्हें 2022 में पद्म श्री से सम्मानित किया। यह सम्मान व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए दिया गया।
जापान में लंबे समय तक कारोबार करने वाले भारतीय मूल के व्यक्ति के लिए यह सम्मान उनके भारत से कायम रिश्ते को भी दर्शाता है।
दो देशों के बीच बनी पहचान
उनकी कहानी की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसमें भारत और जापान दोनों की छाप दिखाई देती है। जन्म भारत में हुआ, लेकिन कारोबारी जीवन का बड़ा हिस्सा जापान में गुजरा।
उन्होंने जापानी समाज में खुद को स्थापित किया और वहां कारोबार को आगे बढ़ाया। साथ ही भारत से जुड़े कारोबारी और सामाजिक संबंधों को भी बनाए रखा।
विदेश में रहने वाले भारतीयों के लिए क्या सीख?
विदेश जाकर सफल होना केवल पूंजी या कारोबारी अवसरों पर निर्भर नहीं करता। नए देश की भाषा, संस्कृति, नियम और लोगों को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है।
उनका लंबा सफर बताता है कि विदेश में अपनी पहचान बनाने के लिए समय, धैर्य और स्थानीय माहौल को समझने की क्षमता जरूरी है। साथ ही अपनी जड़ों से जुड़े रहकर भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम किया जा सकता है।
जयपुर से जापान तक एक लंबी यात्रा
एक समय जयपुर में जन्मे Kamlesh Punjabi के नाम से पहचाने जाने वाले इस व्यक्ति ने जापान में जाकर अपने लिए एक नई पहचान बनाई। होटल और पर्यटन क्षेत्र में उनका लंबा कारोबारी सफर, भारत-जापान संबंधों से जुड़ाव और पद्म श्री सम्मान उनकी यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव हैं।
इसे केवल विदेश में सफल हुए किसी भारतीय की कहानी कहना पर्याप्त नहीं होगा। यह उस बदलाव की कहानी भी है जिसमें एक व्यक्ति अपनी जन्मभूमि की पृष्ठभूमि लेकर दूसरे देश में पहुंचता है, वहां के समाज को समझता है और कई दशकों में अपनी अलग पहचान बनाता है।
