भारत का UPI सिस्टम पहुंचा 11 देशों तक
भारत में डिजिटल भुगतान की तस्वीर पिछले एक दशक में पूरी तरह बदल गई है। कभी पैसे भेजने के लिए बैंक जाना या नकदी का सहारा लेना पड़ता था, लेकिन आज मोबाइल से कुछ सेकंड में लेनदेन पूरा हो जाता है। इस बदलाव में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) की सबसे बड़ी भूमिका रही है। 2016 में 21 बैंकों के साथ शुरू हुई यह भुगतान प्रणाली आज न केवल भारत में करोड़ों लोगों की पहली पसंद बन चुकी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी पहचान मजबूत कर रही है। ग्रीस और मालदीव जैसे देशों में इसकी शुरुआत के बाद अब UPI की पहुंच 11 देशों तक हो गई है।
भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में UPI एक बड़े बदलाव का प्रतीक बन चुका है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) द्वारा विकसित इस प्लेटफॉर्म ने बैंकिंग सेवाओं को आम लोगों के लिए आसान बनाया है। आज सब्जी खरीदने से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग, बिजली बिल जमा करने और कारोबार से जुड़े भुगतान तक, UPI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है।
क्या है UPI और क्यों बढ़ रही है इसकी लोकप्रियता?
UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस एक रियल टाइम डिजिटल भुगतान प्रणाली है। इसकी मदद से एक ही मोबाइल एप्लिकेशन पर कई बैंक खातों को जोड़कर पैसे भेजे और प्राप्त किए जा सकते हैं। इसकी खासियत यह है कि लेनदेन के लिए बैंकिंग समय का इंतजार नहीं करना पड़ता। यह सुविधा 24 घंटे उपलब्ध रहती है।
मोबाइल नंबर, UPI ID या QR कोड के जरिए कुछ ही सेकंड में भुगतान किया जा सकता है। इसके लिए बैंक खाते की लंबी जानकारी साझा करने की जरूरत भी नहीं पड़ती। अलग-अलग बैंकों और भुगतान ऐप के बीच आसानी से लेनदेन की सुविधा ने इसे देशभर में लोकप्रिय बनाया है।
2016 में हुई शुरुआत, एक दशक में बदल गई भुगतान की दुनिया
UPI की शुरुआत अप्रैल 2016 में 21 सदस्य बैंकों के साथ पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हुई थी। अगस्त 2016 में इसे आम लोगों के लिए उपलब्ध कराया गया। इसी साल दिसंबर में BHIM ऐप लॉन्च हुआ, जिसने सीधे बैंक खाते से डिजिटल भुगतान को और आसान बनाया।
इसके बाद लगातार नए फीचर जोड़े गए। 2017 में डायनामिक QR कोड की सुविधा शुरू हुई, जिससे दुकानदारों के लिए डिजिटल भुगतान स्वीकार करना आसान हुआ। 2018 में UPI 2.0 पेश किया गया। इसमें इनवॉइस देखने, हस्ताक्षरित QR कोड, आवर्ती भुगतान और ओवरड्राफ्ट खाते को जोड़ने जैसी सुविधाएं शामिल की गईं।
अक्टूबर 2019 में UPI ने एक महीने में एक अरब यानी 100 करोड़ लेनदेन का आंकड़ा पार किया। यह इसकी बढ़ती लोकप्रियता का बड़ा संकेत था। इसी वर्ष SEBI ने IPO में आवेदन के भुगतान के लिए भी UPI को एक विकल्प के रूप में अनुमति दी।
UPI में जुड़ती गईं नई सुविधाएं
2020 से 2022 के बीच UPI का दायरा और व्यापक हुआ। UPI AutoPay के जरिए बिजली बिल, बीमा प्रीमियम, EMI और सब्सक्रिप्शन जैसे नियमित भुगतान आसान हुए। वहीं फीचर फोन इस्तेमाल करने वालों के लिए UPI 123Pay लॉन्च किया गया, जिससे बिना स्मार्टफोन के भी डिजिटल भुगतान संभव हुआ।
छोटे लेनदेन को तेज बनाने के लिए UPI Lite पेश किया गया। क्रेडिट कार्ड को UPI से जोड़ने की सुविधा ने भी उपयोगकर्ताओं के सामने भुगतान के नए विकल्प खोले।
2023 में UPI पर क्रेडिट लाइन की सुविधा शुरू की गई। इसके तहत बैंक की ओर से पहले से स्वीकृत क्रेडिट सीमा का इस्तेमाल भुगतान के लिए किया जा सकता है।
2024 में UPI Circle लॉन्च किया गया, जिससे प्राथमिक उपयोगकर्ता निर्धारित सीमाओं के भीतर दूसरे लोगों को अपने बैंक खाते से भुगतान करने की अनुमति दे सकता है। इसी साल RBI ने कर भुगतान के लिए UPI की प्रति लेनदेन सीमा एक लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दी।
2025 में फिंगरप्रिंट और फेस अनलॉक जैसी तकनीकों के जरिए भुगतान प्रमाणीकरण को आसान बनाने की दिशा में भी कदम उठाए गए।
लेनदेन के आंकड़ों में दिखी UPI की असली ताकत
UPI की सफलता का अंदाजा इसके बढ़ते आंकड़ों से लगाया जा सकता है। वित्त वर्ष 2016-17 में जहां इसके माध्यम से लगभग दो करोड़ वार्षिक लेनदेन हुए थे, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 24,162 करोड़ से अधिक हो गई। यानी करीब 12,000 गुना की वृद्धि दर्ज की गई।
लेनदेन के कुल मूल्य में भी जबरदस्त उछाल आया है। वित्त वर्ष 2016-17 में यह लगभग 0.07 लाख करोड़ रुपये था, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर करीब 314 लाख करोड़ रुपये हो गया।
जुलाई 2026 के आंकड़ों के अनुसार, UPI नेटवर्क में 741 बैंक सक्रिय थे। इस महीने कुल 2,365.8 करोड़ लेनदेन हुए, जिनका मूल्य 29.87 लाख करोड़ रुपये रहा।
ये आंकड़े बताते हैं कि UPI अब केवल पैसे भेजने का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है।
11 देशों तक पहुंचा भारत का डिजिटल पेमेंट नेटवर्क
UPI की सफलता अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दिखाई दे रही है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की जून 2025 में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में वैश्विक रियल टाइम भुगतान लेनदेन की मात्रा में UPI की हिस्सेदारी लगभग 49 प्रतिशत थी।
फिलहाल भूटान, नेपाल, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, श्रीलंका, मॉरीशस और कतर जैसे देशों में UPI की स्वीकार्यता या सीमा पार भुगतान की सुविधा उपलब्ध है।
जून 2026 में NPCI International Payments Limited ने कंबोडिया के ACLEDA Bank के साथ UPI सुविधा शुरू करने के लिए साझेदारी की। इसी महीने ग्रीस में यूरोबैंक के माध्यम से भारत और ग्रीस के बीच पात्र ग्राहकों के लिए सीमा पार धन हस्तांतरण शुरू हुआ।
इसके बाद 30 जुलाई 2026 को मालदीव की इंस्टेंट पेमेंट प्रणाली Favara और भारत के UPI के बीच सीमा पार धन हस्तांतरण की सुविधा शुरू की गई।
इन घटनाक्रमों के साथ UPI की अंतरराष्ट्रीय पहुंच 11 देशों तक हो गई है। हालांकि, सभी देशों में इसकी सुविधाएं एक जैसी नहीं हैं। कुछ जगहों पर इसका इस्तेमाल दुकानों में भुगतान के लिए किया जा सकता है, जबकि कुछ देशों में सीमा पार धन हस्तांतरण की सुविधा उपलब्ध है।
डिजिटल भुगतान के साथ सुरक्षा भी जरूरी
UPI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच साइबर धोखाधड़ी एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। फर्जी QR कोड, नकली पेमेंट रिक्वेस्ट और संदिग्ध लिंक के जरिए लोगों को निशाना बनाया जाता है। ऐसे में उपयोगकर्ताओं को सतर्क रहने की जरूरत है।
किसी अनजान व्यक्ति की भुगतान रिक्वेस्ट स्वीकार करने से पहले उसकी जांच करनी चाहिए। साथ ही अपना UPI PIN किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए। डिजिटल भुगतान की सफलता के लिए तकनीक के साथ लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी जरूरी है।
भारत की डिजिटल ताकत बन चुका है UPI
21 बैंकों से शुरू हुआ UPI आज भारत की सबसे महत्वपूर्ण डिजिटल भुगतान प्रणालियों में शामिल है। इसने न केवल आम लोगों के लिए लेनदेन आसान बनाया है, बल्कि छोटे कारोबारियों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को भी डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ा है।
11 देशों तक इसका विस्तार भारत की तकनीकी क्षमता और डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों और नई तकनीकों के साथ UPI की भूमिका और व्यापक हो सकती है।
कुल मिलाकर, UPI ने एक दशक में भारत में पैसे के लेनदेन का तरीका बदल दिया है। अब इसकी चुनौती केवल नए देशों तक पहुंचना नहीं, बल्कि सुरक्षित, भरोसेमंद और आसान डिजिटल भुगतान के इस मॉडल को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाना भी है।
स्रोत: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), NPCI और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)।
