वन स्टेशन वन प्रोडक्ट योजना: भारतीय रेलवे की पहल समझिए
भारत के रेलवे स्टेशनों पर एक शांत बदलाव देखने को मिल रहा है। जो स्थान कभी केवल आवागमन के केंद्र थे, वे अब स्थानीय विरासत के जीवंत प्रदर्शन स्थल बनते जा रहे हैं। वन स्टेशन वन प्रोडक्ट (OSOP) पहल के तहत, भारतीय रेलवे प्लेटफॉर्म को ऐसे बाज़ारों में बदल रहा है, जहां क्षेत्रीय हस्तशिल्प आम यात्रियों के और करीब आ रहा है।
केंद्रीय बजट 2022–23 में शुरू की गई इस योजना का तेजी से विस्तार हुआ है। आज 2,000 से अधिक स्टेशनों पर 2,300 से ज्यादा OSOP स्टॉल मौजूद हैं, जो कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और छोटे व्यवसायों को लाखों यात्रियों से जोड़ रहे हैं—और 1.3 लाख से अधिक लोगों की आजीविका को समर्थन दे रहे हैं।
मार्च 2022 में शुरू हुई यह पहल पहले 19 स्टेशनों पर एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू की गई थी, जिसके बाद इसे पूरे देश में विस्तारित किया गया। कम लागत पर स्टॉल उपलब्ध कराना और उन्हें नियमित रूप से बदलना इस योजना को अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करता है। साथ ही, यह राज्य एजेंसियों और MSMEs के साथ मिलकर सुचारु रूप से संचालित की जा रही है।
हर स्टेशन अपनी एक अलग कहानी बयां करता है। तमिलनाडु के तेनकासी जंक्शन पर हस्तनिर्मित बांस उत्पादों से लेकर पटना में मधुबनी पेंटिंग्स तक, ये स्टॉल अपने-अपने क्षेत्रों की सांस्कृतिक पहचान को दर्शाते हैं। इनमें से कई स्टॉल महिला समूहों, बुनकरों, किसानों और कारीगरों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं, जिन्हें अब बड़े बाजारों तक सीधी पहुंच मिल रही है।
पश्चिम बंगाल के आसनसोल रेलवे स्टेशन पर एक कियोस्क, जिसमें हैंडलूम बैग, कालीन और हस्तशिल्प वस्तुएं सजी हैं, यात्रियों को आकर्षित करता है। यहां से लोग सिर्फ सामान नहीं खरीदते—वे अपने साथ स्थानीय परंपरा का एक हिस्सा लेकर जाते हैं।
