भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता, 20 वर्षों बाद बनी सहमति
नई दिल्ली / ब्रसेल्स:
भारत और यूरोपीय संघ (EU) ने लगभग दो दशकों तक चली बातचीत के बाद एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement – FTA) पर सहमति बना ली है। इस समझौते को भारत-यूरोप आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
इस समझौते की घोषणा भारत-ईयू शिखर सम्मेलन के बाद की गई, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन शामिल रहीं। दोनों पक्षों ने इसे व्यापार, निवेश और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बताया।
समझौते के तहत ऑटोमोबाइल, औद्योगिक उत्पादों, कृषि वस्तुओं, वाइन-स्पिरिट्स और दवाओं सहित कई क्षेत्रों में आयात शुल्क में कटौती या उन्हें पूरी तरह समाप्त करने पर सहमति बनी है। इससे भारतीय और यूरोपीय कंपनियों को एक-दूसरे के बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है।
अधिकारियों के अनुसार, यह समझौता लगभग दो अरब उपभोक्ताओं वाले संयुक्त बाजार में व्यापार के नए अवसर खोलेगा। भारतीय टेक्सटाइल, फार्मास्युटिकल और इंजीनियरिंग क्षेत्रों को यूरोपीय बाजार में बढ़त मिलने की संभावना है, जबकि यूरोपीय कंपनियों को भारत में निवेश और निर्यात के नए रास्ते मिलेंगे।
फार्मास्युटिकल क्षेत्र में शुल्क में कमी को विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिससे दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और यूरोप में किफायती दवाओं की उपलब्धता बढ़ सकती है।
यह समझौता केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सेवाएं, निवेश, डिजिटल व्यापार, पर्यावरण संरक्षण और श्रम मानकों से जुड़े प्रावधान भी शामिल हैं। समझौते के लागू होने से पहले अंतिम कानूनी समीक्षा और अनुमोदन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य के बीच यह समझौता भारत और यूरोपीय संघ के बीच दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।
