कॉर्पोरेट केबिन से खुली दुनिया तक: शिव्या नाथ की सच्ची ट्रैवल स्टोरी
दिल्ली की रहने वाली शिव्या नाथ की ज़िंदगी बाहर से बिल्कुल “परफेक्ट” दिखती थी। एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छी नौकरी, तय समय, तय सैलरी और सुरक्षित भविष्य। लेकिन अंदर ही अंदर उन्हें लग रहा था कि उनकी ज़िंदगी सिर्फ एक दायरे में सिमटती जा रही है। हर दिन वही ट्रैफिक, वही ऑफिस, वही स्क्रीन—और सपने कहीं पीछे छूटते जा रहे थे।
साल 2011 में, 23 साल की उम्र में, शिव्या ने एक ऐसा फैसला लिया जो ज़्यादातर लोग सोचते तो हैं, लेकिन करते नहीं। उन्होंने अपनी नौकरी से ब्रेक लिया और अकेले यात्रा पर निकल पड़ीं। शुरुआत भारत से हुई पहले राजस्थान, फिर हिमाचल और उत्तराखंड। शुरुआत आसान नहीं थी। अकेले यात्रा करना, अजनबी जगहें, सीमित पैसे और परिवार की चिंता—सब कुछ साथ था।
धीरे-धीरे शिव्या ने एक अलग तरह से यात्रा करना सीखा। वह महंगे होटल या टूर पैकेज पर भरोसा नहीं करती थीं। वह लोकल बसों में सफर करतीं, होमस्टे में रुकतीं, कई जगहों पर काम के बदले खाना और रहने की जगह लेतीं। कभी योग सेंटर में मदद की, कभी ऑर्गेनिक फार्म में काम किया। इसी तरह उन्होंने अपने खर्च कम रखे और अनुभव ज़्यादा जुटाए।
कुछ समय बाद यह यात्रा भारत से बाहर निकल गई। नेपाल, थाईलैंड, इंडोनेशिया, यूरोप और साउथ अमेरिका—करीब 30 से ज्यादा देशों की यात्रा उन्होंने इसी सादगी के साथ की। कई बार पैसे लगभग खत्म हो जाते थे, कई बार भाषा समझ में नहीं आती थी, लेकिन हर देश में उन्हें इंसानियत ने संभाला। किसी ने खाना दिया, किसी ने रास्ता दिखाया, किसी ने रहने की जगह।
यात्रा के दौरान शिव्या ने महसूस किया कि डर ज़्यादातर हमारे दिमाग में होता है। दुनिया उतनी खतरनाक नहीं है, जितनी हमें लगती है। उन्होंने यह भी समझा कि कम चीज़ों में भी ज़िंदगी पूरी हो सकती है। ज़रूरतें कम हों तो आज़ादी अपने आप बढ़ जाती है।
कई सालों की इस यात्रा के बाद शिव्या ने अपने अनुभवों को शब्दों में ढाला और किताब लिखी “The Shooting Star”। आज वह एक ट्रैवल राइटर, स्पीकर और इंस्पिरेशन हैं। उनकी कहानी उन लाखों भारतीयों को हिम्मत देती है जो रोज़ ऑफिस जाते हैं, लेकिन अंदर से कहीं और जाना चाहते हैं।
