भारत में गिद्ध संकट! 70% आबादी गायब — वाइल्डलाइफ रिपोर्ट ने मचाई सनसनी
नई दिल्ली, 2 नवंबर 2025 भारत में गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (WII) की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ दशकों में देश में गिद्धों की आबादी लगभग 70 प्रतिशत तक घट चुकी है। यह गिरावट भारत की जैव-विविधता और पारिस्थितिक संतुलन के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गई है।
गिद्धों के गायब होने के पीछे कारण
विशेषज्ञों का कहना है कि गिद्धों की मौत का प्रमुख कारण डायक्लोफेनैक (Diclofenac) नामक दर्दनिवारक दवा है, जो पशुओं के इलाज में इस्तेमाल होती है। जब गिद्ध इन मरे हुए पशुओं का मांस खाते हैं, तो दवा का असर उनके शरीर पर जानलेवा साबित होता है।
इसके अलावा, वन क्षेत्रों में कमी, खाद्य स्रोतों का घटाव, और मानव गतिविधियों का बढ़ता प्रभाव भी गिद्धों की गिरती संख्या के पीछे प्रमुख वजह मानी जा रही है।
पर्यावरण पर असर
गिद्ध प्राकृतिक रूप से “साफ-सफाई करने वाले” पक्षी हैं, जो मृत पशुओं को खाकर बीमारियों के फैलने से रोकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर गिद्धों की संख्या यूँ ही घटती रही, तो कई संचारी रोगों के फैलने का खतरा बढ़ सकता है।
सरकार और वैज्ञानिकों की पहल
भारतीय वन्यजीव संस्थान ने गिद्ध संरक्षण के लिए कई नए कदम उठाने की सिफारिश की है। इनमें सेफ ज़ोन प्रोजेक्ट्स, कैप्टिव ब्रीडिंग प्रोग्राम्स, और वेटरनरी दवाओं पर सख़्त नियंत्रण शामिल हैं।
सरकार भी इस दिशा में नए राष्ट्रीय गिद्ध संरक्षण नीति पर काम कर रही है, ताकि आने वाले वर्षों में इस संकट को रोका जा सके।
