खाड़ी संकट में फंसे भारतीय: सरकार ने शुरू की वापसी प्रक्रिया
ईरान को लेकर बढ़े तनाव और अमेरिका-इस्राएल की सैन्य कार्रवाई के बाद खाड़ी क्षेत्र में हालात अचानक बदल गए हैं। इस स्थिति का सबसे बड़ा असर वहां रह रहे भारतीयों पर पड़ा है। लाखों की संख्या में भारतीय कामगार, छात्र और पर्यटक अलग-अलग देशों में फंसे हुए हैं, जिनकी सुरक्षित वापसी को लेकर उनके परिवार भारत में चिंतित हैं।
घर से दूर इन लोगों के लिए अनिश्चितता का यह दौर आसान नहीं है। वहीं भारत में उनके परिजन लगातार फोन, सोशल मीडिया और सरकारी अपडेट के जरिए हालात जानने की कोशिश कर रहे हैं।
सरकार की वापसी मुहिम जारी
भारत सरकार ने हालात की गंभीरता को देखते हुए फंसे नागरिकों को वापस लाने के प्रयास तेज कर दिए हैं। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 28 फरवरी को तनाव बढ़ने के बाद 1 से 7 मार्च के बीच 52 हजार से अधिक भारतीयों को सुरक्षित देश वापस लाया जा चुका है। इनमें से करीब 32 हजार लोग भारतीय उड़ानों के जरिए लौटे, जबकि बाकी ने विदेशी एयरलाइंस का सहारा लिया।
सरकार का कहना है कि यह अभियान लगातार जारी है और जरूरत के अनुसार और उड़ानों की व्यवस्था की जा रही है।
विदेश मंत्रालय की सलाह
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने जानकारी दी कि सरकार पश्चिम एशिया के हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने वहां मौजूद भारतीयों से अपील की है कि वे स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और अपने नजदीकी भारतीय दूतावास या वाणिज्य दूतावास से संपर्क में रहें।
यह सलाह खास तौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो ट्रांजिट या छोटी अवधि के लिए यात्रा कर रहे थे और अचानक बदलती स्थिति में वहीं रुक गए हैं।
उड़ानों पर असर, यात्रियों की मुश्किलें
सैन्य कार्रवाई के बाद क्षेत्र के कई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर सेवाएं प्रभावित हुई हैं। कई जगह उड़ानें रद्द कर दी गई हैं या अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं। इसका सीधा असर उन यात्रियों पर पड़ा है जो काम, पढ़ाई या पर्यटन के लिए इन देशों में गए थे।
उड़ानों के ठप होने से हजारों लोग वहीं फंस गए हैं और उनकी वापसी में देरी हो रही है।
खाड़ी में बड़ी भारतीय आबादी
खाड़ी देशों में भारतीयों की मौजूदगी लंबे समय से रही है। रोजगार के बेहतर अवसर और अच्छी आय के कारण बड़ी संख्या में लोग यहां काम करने जाते हैं। विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इन देशों में करीब 90 लाख भारतीय रहते हैं।
उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से भी बड़ी संख्या में लोग खाड़ी देशों में काम करते हैं, खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश से। इसके अलावा देश के कई अन्य हिस्सों से भी लोग रोजगार और व्यापार के लिए वहां जाते हैं।
परिवारों में चिंता का माहौल
जैसे-जैसे हालात अनिश्चित बने हुए हैं, भारत में परिवारों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। कई लोग अपने प्रियजनों से संपर्क न हो पाने के कारण बेचैन हैं। हालांकि सरकार की ओर से चलाए जा रहे राहत और वापसी अभियान से कुछ हद तक भरोसा बना है।
आगे की राह
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक क्षेत्र में हालात सामान्य नहीं होते, तब तक ऐसी चुनौतियां बनी रह सकती हैं। ऐसे में सरकार, दूतावास और स्थानीय प्रशासन के बीच तालमेल बेहद जरूरी है ताकि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और वापसी सुनिश्चित की जा सके।
