थाईलैंड–कंबोडिया सीमा पर शिव मंदिर विवाद से तनाव बढ़ा
बैंकॉक/पनोम पेन्ह — दक्षिण-पूर्व एशिया के पड़ोसी देशों थाईलैंड और कंबोडिया के बीच वर्षों से चले आ रहे प्रेह विहियर मंदिर विवाद ने एक बार फिर तनाव बढ़ा दिया है। 11वीं सदी के आसपास निर्मित यह शिव मंदिर कंबोडिया की सीमा पर स्थित है, लेकिन इसके आस-पास के क्षेत्र पर दोनों देशों का दावा लंबे समय से चलता आ रहा है।
सीमा विवाद की जड़ में ऐतिहासिक मतभेद
अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने मंदिर परिसर को कंबोडिया के अधिकार में माना था, लेकिन मंदिर से लगे पहाड़ी और सीमावर्ती इलाके की स्वामित्व रेखा को लेकर मतभेद आज भी बना हुआ है। जब भी सीमा पर सैन्य गतिविधियाँ बढ़ती हैं, यह विवाद फिर सामने आ जाता है।
कंबोडिया का दावा: सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा
कंबोडिया का कहना है कि प्रेह विहियर मंदिर उसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। उसका आरोप है कि थाईलैंड की सुरक्षा गतिविधियाँ मंदिर क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करती हैं। कंबोडिया चाहता है कि मंदिर और उसके आसपास का पूरा क्षेत्र उसके प्रशासनिक नियंत्रण में रहे।
थाईलैंड की प्रतिक्रिया: सीमा रेखाओं में अस्पष्टता
थाईलैंड का तर्क है कि सीमा निर्धारण के पुराने नक्शों में कई असपष्टताएँ हैं। उसके अनुसार मंदिर से सटे इलाके में ऐतिहासिक उपस्थिति और स्थानीय समुदायों का जुड़ाव भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। थाई सेना ने कहा कि उसकी कार्रवाई सुरक्षा खतरों की स्थिति में ही होती है।
स्थानीय लोगों की दिक्कतें बढ़ीं
हाल के दिनों में दोनों देशों ने सीमा के कई हिस्सों पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं। इससे सीमावर्ती गांवों के लोगों में भय बढ़ गया है। कई परिवारों ने सुरक्षित इलाकों में जाना शुरू कर दिया है और स्थानीय बाजार व व्यवसाय प्रभावित हुए हैं।
सांस्कृतिक विरासत को नुकसान का खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ता तनाव प्रेह विहियर जैसे प्राचीन धरोहर स्थल के लिए खतरा बन सकता है। यह मंदिर दक्षिण-पूर्व एशिया की सांस्कृतिक और वास्तुकला विरासत में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
अंतरराष्ट्रीय अपील: बातचीत ही समाधान
अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने दोनों देशों से आग्रह किया है कि वे कूटनीतिक बातचीत के जरिए समाधान खोजें और मंदिर को राजनीतिक विवाद का केंद्र न बनने दें। विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा विवादों का समाधान शांतिपूर्ण वार्ता के माध्यम से ही संभव है
