ताजमहल की सजावट में वास्तुकला का सख्ती से पालन किया गया था

आगरा। मुगलों का मानना था कि प्रेसियस और सेमी प्रेसियस पत्थरों का अलग-अलग व्यक्तियों और स्थानों के भाग्य पर अलग-अलग प्रभाव पड़ता है। वे शुभ या अशुभ हो सकते हैं। ताजमहल में लगे सेमी प्रेसियस और प्रेशियस पत्थरों को कभी कभी ऊपरी तिब्बत, कुमाऊँ, जैसलमेर, कैम्बे और सीलोन जैसे दूर […]

कबूतरबाजी का शौक मुगलों के समय से अब भी जारी है आगरा में

आगरा में कबूतरबाजी का शौक मुगलों के शासनकाल से अब भी जारी है। मुगल सम्राट अकबर कबूतरों के बहुत शौकीन थे । कबूतरबाजी मनोरंजक खेल माना जाता था। कबूतरबाजी कई नवाबों का पसंदीदा पास्ट टाइम था। मुगल सम्राट अकबर को इस मध्यकालीन खेल के प्रति काफी आकर्षण था , जिसे […]

गंगा तालाब मॉरीशस में भारत का एक छोटा सा टुकड़ा

गंगा तालाब को मॉरीशस में भारत का एक छोटा सा टुकड़ा माना जाता है। इसको नदी गंगा के साथ प्रतीकात्मक संबंध मानते हैं। लोगों का कहना है कि गंगा झील की गहराई कोई नहीं जानता है । महा शिवरात्रि के दौरान, मारीशस के दूर दूर के शहरों में रहने वाले […]

पुणे-सिंगापुर उड़ान की शुरुआत पुणे के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि

पुणे – नागरिक उड्डयन और इस्पात मंत्री, ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने पुणे से सिंगापुर के लिए सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवा का उद्घाटन किया। श्री सिंधिया ने कहा कि अपनी समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ पुणे शहर नवाचार, शिक्षा और विकास का प्रमुख केंद्र बनने की दिशा में लगातार […]

सास और बहू का बिहारी फूड बहुत लोकप्रिय हो गया है दिल्ली में

नई दिल्ली – भारत में बहुत से लोगों ने महामारी से प्रेरित लॉकडाउन अवधि के दौरान अपने घर से व्यावसायिक उद्यम शुरू किए थे । दिल्ली से मंजरी सिंह और उनकी सास हिरण्यमयी शिवानी भी उद्यम शुरू करने वालों में से एक हैं। सास और बहु ने एक क्लाउड किचन […]

मार्बल जड़ाई की कारीगरी प्रथा युगों से जारी है आगरा की गलियों में

आगरा शहर के सघन, भीड़भाड़ वाले इलाकों में संगमरमर की जड़ाई का जटिल शिल्प काम अभी भी चलन में है। जड़ाई करने वाले कुशल कारीगर अक्सर नई की मंडी, ताज गंज, गोकुलपुरा और अन्य छोटे इलाकों तथा बस्तियों में ताजमहल के आसपास रहना जारी किये हुए हैं। ये कारीगर अब […]

फिल्म ‘ रेखा ‘ सड़क पर रहने वालों के प्रति समाज के रवैये पर सवाल उठाती है

गोवा – 53वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (इफ्फी) में भारतीय पैनोरमा के नॉन-फीचर वर्ग में सड़क पर रहने वाले लोगों के रोज़मर्रा के संघर्ष, उनकी स्वच्छता और स्वच्छता के मुद्दों और उनके प्रति समाज के रवैये पर एक फिल्म दिखाई गई। ‘रेखा’ नाम की इस मराठी, नॉन-फीचर फिल्म के निर्देशक […]