Author: राजीव सक्सेना
आगरा की औपनिवेशिक वास्तुकला भी देखना पसंद करते हैं अब विदेशी पर्यटक
आगरा शहर में मुग़ल कालीन इमारतों के अतरिक्त औपनिवेशिक समय की स्थापत्य विरासत देखने को मिल सकती है। आगरा ब्रिटिश काल के दौरान क्षेत्रीय रूप से महत्वपूर्ण केंद्र थे। हर की विविध वास्तुशिल्प विरासत की ज्यादातर संरचनाएं आगरा के एमजी रोड और सिविल लाइंस इलाके में हैं। साथ ही आगरा […]
महात्मा गांधी आयुर्वेदिक इलाज के दौरान 11 दिनों तक आगरा में रहे थे
आगरा का नाम हर्बल दवाओं से इलाज के लिए पुराने समय से जुड़ा हुआ है। एक बार महात्मा गांधी भी 1929 में एक स्थानीय वैद्य के इलाज के दौरान 11 दिनों तक आगरा में रहे थे । उनका इलाज यहाँ के वैद्य रामदत्त शर्मा द्वारा किया गया था। एक मशहूर […]
लाला दीन दयाल के आगरा के पुराने फोटो ब्रिटिश लाइब्रेरी का आकर्षक हिस्सा हैं
बहुत से लोग पुराने फोटो फेंक देते हैं किन्तु बाद में उन्हें पछताना पड़ता है। ब्रिटिश लाइब्रेरी लंदन के इंडिया ऑफिस फोटोग्राफ संग्रह में भारत और पाकिस्तान और एशिया के अन्य हिस्सों से 1850 के बाद से लगभग 250,000 पुराने फोटो का सबसे बड़ा संग्रह है । इन चित्रों में […]
भारत में वाहन न तो रुकते हैं और न ही पैदल चलने वालों को रास्ता देते हैं
पैदल आबादी के लिए भारत के अधिकांश शहर काफी असुरक्षित दिखाई देते हैं। अफसोस की बात है कि भारतीय सड़कों को कभी भी पैदल चलने वालों की सुरक्षा के लिए प्राथमिकता के साथ डिजाइन नहीं किया जाता है। आमतौर पर पैदल चलने वालों को सड़कों पर एक छोटा सा क्षेत्र […]
इंदौर की स्वछता तकनीकि कनाडा भी शुरू करेगा अपने देश में
स्वच्छता के लिए इंदौर शहर भारत में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी ख्याति पा रहा है। भारत और कनाडा के स्टार्टअप वेस्ट मैनेजमेंट की नई तकनीकों पर एक साथ काम करेंगे । जिसमें इंदौर का स्टार्टअप ‘स्वाहा’ भी शामिल है, जो सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में विशेष रूप से काम […]
वे बाहर अँधेरे से घिरे हैं लेकिन उनके भीतर एक रोशनी है
नई दिल्ली – वेटर्न फोटो पत्रकार शिप्रा दास को सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा दिए गए राष्ट्रीय फोटोग्राफी पुरस्कारों में लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित किया गया।उनकी फोटो बुक द लाइट विदइन, ए डिफरेंट विजन ऑफ लाइफ 12 साल लंबे प्रोजेक्ट की पराकाष्ठा है। जब शिप्रा दास ने एक ऐसी […]
वाराणसी की प्राचीन मार्शल आर्ट मुस्ति युद्ध कला होती जा रही है अब गायब
वाराणसी की मुस्ति युद्ध कला के बारे में शायद आपने सुना हो। 1960 के दशक में यह एक लोकप्रिय कला रूप था, किन्तु बनारस में अब यह बहुत कम दिखाई देता है। संस्कृत भाषा में मुस्ति (मुट्ठी) और युद्ध (लड़ाई) से, नाम का अर्थ है “मुट्ठी लड़ाई”(लड़ाई, लड़ाई तथा संघर्ष […]
