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2026 में NRI जमा में बड़ी गिरावट, निवेशकों में बढ़ी चिंता

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2026 की शुरुआत में भारत में NRI जमा (Non-Resident Indian Deposits) में तेज गिरावट देखी गई है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, विदेश में रहने वाले भारतीयों द्वारा भारतीय बैंकों में भेजे गए पैसे में पिछले साल की तुलना में लगभग 26% की कमी आई है। कुल जमा राशि अब लगभग $10.6 बिलियन रह गई है, जो पिछले कुछ वर्षों में सबसे बड़ी गिरावट में से एक मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (FCNR) जमा में रुचि कम होने के कारण हुई है। पहले ये जमा निवेशकों के लिए आकर्षक थे क्योंकि इनमें उच्च ब्याज दरें और मुद्रा लाभ शामिल थे। लेकिन अब वैश्विक ब्याज दरों के स्थिर होने और मुद्रा उतार-चढ़ाव के कम होने के कारण, कई NRI अपने निवेश विकल्पों पर फिर से विचार कर रहे हैं।

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता भी इस गिरावट का एक बड़ा कारण है। कुछ क्षेत्रों में आर्थिक मंदी, भू-राजनीतिक तनाव और वित्तीय नियमों में बदलाव ने NRI को सीमा-पार धन हस्तांतरण को लेकर सतर्क बना दिया है। इसके अलावा, भारत में अपडेट किए गए कर नियम, जैसे विदेशी आय पर कड़ी निगरानी, निवेश निर्णयों को प्रभावित कर रहे हैं।

हालांकि, वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट स्थायी नहीं है। भारत अब भी दीर्घकालिक निवेश के लिए आकर्षक गंतव्य बना हुआ है, खासकर रियल एस्टेट, स्टॉक मार्केट और स्टार्टअप सेक्टर में। बैंकों और वित्तीय संस्थानों को नए स्कीम और योजनाएं पेश करनी पड़ सकती हैं ताकि NRI को फिर से निवेश के लिए आकर्षित किया जा सके।

अंत में, 2026 में NRI जमा में यह गिरावट वैश्विक वित्तीय परिदृश्य में बदलाव को दर्शाती है, न कि भारत से निवेशकों के पूरी तरह हटने को। आने वाले महीनों में स्थिति और स्पष्ट होगी कि यह केवल अस्थायी गिरावट है या लंबी अवधि का रुझान बन रहा है।