सोशल मीडिया और बच्चों की सुरक्षा: माता-पिता और सरकारी भूमिका

क्या 16 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया पर रोक लगे

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देश में बच्चों पर सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव को लेकर संसद में चिंता जताई गई है। तेलुगु देशम पार्टी के सांसद एल. एस. के. देवरायलु ने बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध या कड़े नियम लागू करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि कम उम्र में सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई और सामाजिक व्यवहार पर नकारात्मक असर डाल रहा है। साइबर बुलिंग, ऑनलाइन लत, अनुचित और हिंसक सामग्री तक आसान पहुंच और डिजिटल अपराधों का खतरा लगातार बढ़ रहा है।

सांसद ने बताया कि बच्चे भावनात्मक और मानसिक रूप से सोशल मीडिया के दबाव और एल्गोरिदम को समझने के लिए पर्याप्त परिपक्व नहीं होते। इससे उनमें तनाव, आत्मविश्वास की कमी और ध्यान में गिरावट जैसी समस्याएँ सामने आ रही हैं। उन्होंने सरकार से बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया।

उन्होंने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया और अन्य विकसित देशों में बच्चों के लिए सोशल मीडिया उपयोग पर सख्त नियम और आयु-आधारित प्रतिबंध लागू हैं। कुछ देशों में आयु सत्यापन प्रणाली मजबूत है और नाबालिगों के लिए सोशल मीडिया का उपयोग सीमित किया गया है। सांसदों का मानना है कि भारत को भी वैश्विक अनुभवों से सीखकर बच्चों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।

प्रस्ताव में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रभावी आयु सत्यापन, नियम उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई और माता-पिता व स्कूलों के लिए जागरूकता कार्यक्रम लागू करने की मांग की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीक और बच्चों की सुरक्षा के बीच संतुलन बनाना आज सबसे बड़ी जरूरत है।